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बाँध लो


बाँध लो कुछ सुकर्म फलकुछ नेकियाँ भी बाँध लोसाथ कुछ ले जा न सकोगेभर भर के झोलियाँ बाँट दो

नेकी का सिला मिलेगा वहाँऔर कर्मों का पुण्य प्रसाद भीखाली हाथ जाना है जहाँहोगा वहीं सबका हिसाब भी।

मं शर्मा (रज़ा)

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