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बाकी रहा


आवाज भी जाती रहीअंदाज़ ही बाकी रहारूह भी मरती रहीश्वास ही चलता रहा

डोर को सुलझा लेताकोई सिरा ना मिलाअहसास जब चुक गयारिश्ते में बाकी क्या रहा।

मं शर्मा (रज़ा)।।।

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