Poetry 1 min read 515.9K reads

बदस्तूर


ख्वाब पलकों कीदहलीज पररात भरदस्तक देते रहे

न नींद आईन ख्वाब आएरात बदस्तूरआती जाती रही ।

मं शर्मा (रज़ा)

Read more Earn more Learn more