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अविवेकी


जी में आया कर दियाजो मन किया कह दियाअविवेकी मन की जुर्रत नेकितनों को नाराज किया

विवेकी मन सोचता रहाशब्दों को तोलता रहाकुछ न कर पाने की भूल काउम्रभर अफसोस होता रहा।

मं शर्मा (रज़ा)

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