जीवन था पतझड़ जैसासाँसों की आवाजाही थीतुम हो तो सार्थक हैमेरा जीवन कागज़ी।मं शर्मा (रज़ा)
जीवन था पतझड़ जैसासाँसों की आवाजाही थीतुम हो तो सार्थक हैमेरा जीवन कागज़ी।
मं शर्मा (रज़ा)