मैं ही सत हूँमैं ही बृह्म हूँमैं स्वयं परस्वावलंब रहा हूँसत्कर्म सभीकर्म हैं मेरेएकांत से दूरअविलंब चला हूँकोई अनुभूतिनहीं चिंतन मेंअपने कर्मों केअतिदंभ में जीया हूँ।मं शर्मा (रज़ा)
मैं ही सत हूँमैं ही बृह्म हूँमैं स्वयं परस्वावलंब रहा हूँ
सत्कर्म सभीकर्म हैं मेरेएकांत से दूरअविलंब चला हूँ
कोई अनुभूतिनहीं चिंतन मेंअपने कर्मों केअतिदंभ में जीया हूँ।
मं शर्मा (रज़ा)