मेरी आस्था तुझ में है

मेरी श्रद्धा तुझ में है

मेरे भावों की अभिव्यक्ति

क्या मेरे शब्दों में है


दीप जलाऊँ पुष्प चढ़ाऊँ

चरणों में शीश नवाऊँ

मन मंदिर में तुम बसे हो

किस विधि तुमको बतलाऊँ।



मं शर्मा (रज़ा)