नयनों से छलकेकपोलों पर ढलकेदो अश्रु अधरों परमुस्कान बिखेर गएप्रायश्चित की मार कोमिलन की आस कोविरह की आग कोनिशब्द अश्रु जता गए।मं शर्मा (रज़ा)
नयनों से छलकेकपोलों पर ढलकेदो अश्रु अधरों परमुस्कान बिखेर गए
प्रायश्चित की मार कोमिलन की आस कोविरह की आग कोनिशब्द अश्रु जता गए।
मं शर्मा (रज़ा)