Poetry 1 min read 299.8K reads

अश्रु


नयनों से छलकेकपोलों पर ढलकेदो अश्रु अधरों परमुस्कान बिखेर गए

प्रायश्चित की मार कोमिलन की आस कोविरह की आग कोनिशब्द अश्रु जता गए।

मं शर्मा (रज़ा)

Read more Earn more Learn more