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आश्रय


न धूप सेन छाँव सेनिर्भीक खड़ामैं शान से

डरता नहींमौसमी मार सेआहत हूँतुम्हारे प्रहार से

अब क्यों खोजतेछाया मेरीजी भरा नहींअभी वार से ।

मं शर्मा (रज़ा)

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