तू ही तो है रब मेरा

जीने का सबब मेरा

तू ही इबादत है मेरी

तू ही आसरा मेरा


तुझी से इश्क है मुझे

तुझी से है वास्ता मेरा

किसी और दर पे जाऊँ क्यों

तेरे प्यार का मुझे आसरा।


मं शर्मा( रज़ा)