क्षितिज से जबनिकलेगा सूरजकाली रातछट जाएगीस्वर्णिम अरूणिमा केप्रकाशपुंज सेधरती की आभाबढ़ जाएगीसूने मन केअंधेरे कोने मेंआशा की दीपशिखालहराएगी ।मं शर्मा (रज़ा)#स्वरचित
क्षितिज से जबनिकलेगा सूरजकाली रातछट जाएगी
स्वर्णिम अरूणिमा केप्रकाशपुंज सेधरती की आभाबढ़ जाएगी
सूने मन केअंधेरे कोने मेंआशा की दीपशिखालहराएगी ।
मं शर्मा (रज़ा)#स्वरचित