कल लुप्त थाआज अर्द्ध हूँकल पुनःपूर्ण हो जाऊँगागगनवासी हूँनियतिवश लेकिनइस धरा कोसदैव जगमगाऊँगा।मं शर्मा (रज़ा)
कल लुप्त थाआज अर्द्ध हूँकल पुनःपूर्ण हो जाऊँगा
गगनवासी हूँनियतिवश लेकिनइस धरा कोसदैव जगमगाऊँगा।
मं शर्मा (रज़ा)