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अर्चना


अपने मन के रंग चाहे सबनेसब के मन में फरेब थासतरंगी कर दुनिया को वोबन गया बड़ा रंगरेज़ था

सुख के कुछ दुख के थेशुचिता और कलुषता के थेभाँति भाँति के रंग भरने मेंकिया न उसने परहेज़ था।

मं शर्मा (रज़ा)

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