पल दो पल ठहर जातेथोड़ा सा संभल जातेहर पल की आपाधापी सेथोड़ा सा संभल पातेपल भर की चूक सेजीवन गणित बिगड़ गयाखुशी अर्जित करने चले थेसंतोष गंवा कर चल दिए।मं शर्मा (रज़ा)
पल दो पल ठहर जातेथोड़ा सा संभल जातेहर पल की आपाधापी सेथोड़ा सा संभल पातेपल भर की चूक सेजीवन गणित बिगड़ गयाखुशी अर्जित करने चले थेसंतोष गंवा कर चल दिए।
मं शर्मा (रज़ा)