तुम भी हमारेहम भी तुम्हारेन हम आए कभीन तुम ही पधारेकहीं रहो तुमनहीं हम विचारेबिगड़े कि बनेतुम्हीं ने संवारेलगते हों कहीं भीआस्था के जयकारेपहुँचती है अनुगूँजकानों में हमारे ।मं शर्मा (रज़ा)
तुम भी हमारेहम भी तुम्हारेन हम आए कभीन तुम ही पधारे
कहीं रहो तुमनहीं हम विचारेबिगड़े कि बनेतुम्हीं ने संवारे
लगते हों कहीं भीआस्था के जयकारेपहुँचती है अनुगूँजकानों में हमारे ।
मं शर्मा (रज़ा)