कहीं धरती कहीं आकाश नहीं हैफिर भी जीना सबको यहीं हैकहीं रोटी कहीं भूख नहीं हैलकीरों का अंकगणित यही है।मं शर्मा (रज़ा)
कहीं धरती कहीं आकाश नहीं हैफिर भी जीना सबको यहीं है
कहीं रोटी कहीं भूख नहीं हैलकीरों का अंकगणित यही है।
मं शर्मा (रज़ा)