Poetry 1 min read 995 reads

अंकगणित


कहीं धरती कहीं आकाश नहीं हैफिर भी जीना सबको यहीं है

कहीं रोटी कहीं भूख नहीं हैलकीरों का अंकगणित यही है।

मं शर्मा (रज़ा)

Read more Earn more Learn more