Poetry 1 min read 134.3K reads

अंधेरे


रोशनी पुकारती थीमैं उस ओर बढ़ चलामंजिल न मिली कभीमैं जिस ओर भी चला

अंधेरे डराते थे बहुतमैं डर पीछे छोड़ चलाबहुत सवाल पूछते थे लोगसबको जवाब देता चला।

मं शर्मा (रज़ा)

Read more Earn more Learn more