बातों में चतुराई नहीं हैभावों में गहराई नहीं हैसतही सारी बातें तेरीकिसी ने अपनाई नहीं हैसार क्या तेरी बातों काअनर्गल वार्त्तालापों काह्रदय को ना छू जाए जोबात किसीको भाई नहीं है।मं शर्मा (रज़ा)
बातों में चतुराई नहीं हैभावों में गहराई नहीं हैसतही सारी बातें तेरीकिसी ने अपनाई नहीं है
सार क्या तेरी बातों काअनर्गल वार्त्तालापों काह्रदय को ना छू जाए जोबात किसीको भाई नहीं है।
मं शर्मा (रज़ा)