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आनन


सिर मोर मुकुटऊँचा मस्तकआँखों में चमकबातों में खनक

दमकता आननमोहिनी मुस्कानप्रेम की खानहे करूणानिधान

अद्भुत रूप काकैसे करूँ बखानचहुँदिशाओं मेंतेरा ही गुणगान।

मं शर्मा (रज़ा)

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