कुछ अनमने से शेर लगेगज़ल भी उदास सीजाने कौन उड़ेल गयालफ्ज़ों में मायूसीभोर के उजालों में भीरात की बदहवासीदर्द को छलकाने में कोईकर गया कंजूसी।मं शर्मा (रज़ा)
कुछ अनमने से शेर लगेगज़ल भी उदास सीजाने कौन उड़ेल गयालफ्ज़ों में मायूसी
भोर के उजालों में भीरात की बदहवासीदर्द को छलकाने में कोईकर गया कंजूसी।
मं शर्मा (रज़ा)