हर दिन एक सवेरा हैरात प्रतिदिन आनी हैतेरे मेरे बस में क्या हैफिर क्यूँ आनाकानी हैसुख दुख तो आने जाने हैंकिस बात की परेशानी हैहंस के जी कि रो के जीउम्र फिर भी कट जानी है।मं शर्मा( रज़ा)।
हर दिन एक सवेरा हैरात प्रतिदिन आनी हैतेरे मेरे बस में क्या हैफिर क्यूँ आनाकानी है
सुख दुख तो आने जाने हैंकिस बात की परेशानी हैहंस के जी कि रो के जीउम्र फिर भी कट जानी है।
मं शर्मा( रज़ा)।