Poetry 1 min read 563.8K reads

अनदेखे


अंजाने अनदेखे से चेहरेनित नित दिखलाए आईनाफिर फिर देखाअपना चेहराफिर भी न झल्लाए आईनाकिस चेहरे से पहचान हो मेरीये बात समझ मेरे आई ना ।

मं शर्मा (रज़ा)

Read more Earn more Learn more