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अमृतधारा


अमृतधारा सा शीतल जलबहते बहते थम गयाचाँदी की धवल धारा था पहलेबहते बहते हिम हुआचंचल चपला नार सरीखामौन तपस्वी शिव हुआ।

मं शर्मा (रज़ा)

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