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आँचल


तेरे आँचल तक थी दुनियामाँ तब तक ही अच्छी थीजिस दुनिया में छोड़ गई तूमुझसे नहीं वो झिलती है

फिर उन्हीं पलों को जीना हैमाँ तेरे आँचल में रहना हैनहीं चाहिए धन और दौलतबस ममता की छाँव में रहना है।

मं शर्मा (रज़ा)

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