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अमावस


जुगनू नहीं कि टिमटिमाता रहूँगादीया हूँ मैं रोशनियां लुटाता हूँ

अंधेरा नहीं कि दीये से भाग जाऊँअमावस हूँ चाँद को निगल जाता हूँ।

मं शर्मा (रज़ा)

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