बचपन बड़ा अल्हड़ थाहंसते खेलते गुज़र गयाजवानी बहुत तूफानी थीउन्मादी इठलाती रह गईबुढ़ापा बहुत संजीदा थाचिंतन मनन करता रहाक्या खोया क्या पाया थाउसका हिसाब करता रहा।मं शर्मा (रज़ा)
बचपन बड़ा अल्हड़ थाहंसते खेलते गुज़र गयाजवानी बहुत तूफानी थीउन्मादी इठलाती रह गई
बुढ़ापा बहुत संजीदा थाचिंतन मनन करता रहाक्या खोया क्या पाया थाउसका हिसाब करता रहा।
मं शर्मा (रज़ा)