किस्से गढ़ेंगे इर्द गिर्द बैठ तुम्हारे
देखना कहीं दास्तां न हो जाना तुम
लोग फेंकेगे चिंगारियाँ मेरे दोस्त
देखना कहीं अलाव न हो जाना तुम।
मं शर्मा (रज़ा)


किस्से गढ़ेंगे इर्द गिर्द बैठ तुम्हारे
देखना कहीं दास्तां न हो जाना तुम
लोग फेंकेगे चिंगारियाँ मेरे दोस्त
देखना कहीं अलाव न हो जाना तुम।
मं शर्मा (रज़ा)