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अक्षय


तू सृष्टि का सर्जक हैतेरा ही सब निर्माण हैसुख संपदा साधनयुक्तये जीवन तेरा वरदान है

सब कुछ विद्यमान यहाँपर सब कुछ नाशवान हैकेवल एक प्रेम अक्षय हैतू स्वयं इसका प्रमाण है।

मं शर्मा (रज़ा)

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