किस्मत की डोर उसके हाथ है
न पतंग को न गगन को पता था
उड़ा ले गई दूर हवा गगन में
आखिर उसको कटना ही था
फिर ले आया वक्त तेरे सामने
आखिर हमारा मिलना बदा था
यूँ तुमसे मिलना भी आखिरी है
ये भी हमको कहाँ पता था ।
मं शर्मा (रज़ा)
किस्मत की डोर उसके हाथ है
न पतंग को न गगन को पता था
उड़ा ले गई दूर हवा गगन में
आखिर उसको कटना ही था
फिर ले आया वक्त तेरे सामने
आखिर हमारा मिलना बदा था
यूँ तुमसे मिलना भी आखिरी है
ये भी हमको कहाँ पता था ।
मं शर्मा (रज़ा)