वर्णों में वर्णित नहीं मैंभाषा तक सीमित नहीं हूँमैं अथाह अनंत विस्तारशब्दों में परिभाषित नहीं हूँदर्द में परिलक्षित हूँ कभीकभी खुशियों का पारावार हूँकेवल महसूस कर मुझे मैंअदृश्य अगोचर अहसास हूँ।मं शर्मा( रज़ा)#स्वरचित
वर्णों में वर्णित नहीं मैंभाषा तक सीमित नहीं हूँमैं अथाह अनंत विस्तारशब्दों में परिभाषित नहीं हूँ
दर्द में परिलक्षित हूँ कभीकभी खुशियों का पारावार हूँकेवल महसूस कर मुझे मैंअदृश्य अगोचर अहसास हूँ।
मं शर्मा( रज़ा)
#स्वरचित