Poetry 1 min read 111K reads

अद्भुत


नाकाम प्रयासों का अद्भुत प्रयत्न हूँपराजय के बाद की जीत का जश्न हूँ

डटा हूँ समर में अभी तक क्या कम हैलहराते परचम का मैं इतराता दंभ हूँ ।

मं शर्मा (रज़ा)

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