तुम तो जानती हो

आदत मेरी

उसी डायरी में

खुद को जिंदा रखता हूँ


भूल जाता हूँ जब

खुद को रख कर कहीं

तुम्हारी याद

मुझे मुझसे मिलाती है।



मं शर्मा( रज़ा)