पहले पहले जंग थीअजीब सी कशिश थीदिखावे का आडंबर थाअहम लगा दाँव पे थाप्रीत की बरसात हुईकोशिशों की जीत हुईजीत का प्रतीक तुमआदत बन के रह गई।मं शर्मा (रज़ा)
पहले पहले जंग थीअजीब सी कशिश थीदिखावे का आडंबर थाअहम लगा दाँव पे था
प्रीत की बरसात हुईकोशिशों की जीत हुईजीत का प्रतीक तुमआदत बन के रह गई।
मं शर्मा (रज़ा)