कहने को बहुत कुछ हैकहता नहीं हूँभावनाओं से हूँ लबरेज़छलकता नहीं हूँदिल में उठ रहे बवंडरदिखता खामोश हूँकलम बोलती है बहुतमैं न सुनने का अभ्यस्त हूँ।मं शर्मा (रज़ा)
कहने को बहुत कुछ हैकहता नहीं हूँभावनाओं से हूँ लबरेज़छलकता नहीं हूँ
दिल में उठ रहे बवंडरदिखता खामोश हूँकलम बोलती है बहुतमैं न सुनने का अभ्यस्त हूँ।
मं शर्मा (रज़ा)