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अभिसार


कान में झुमका बालों में गजरायौवन का अभिसार लिएसूनी राह की तपती डगर पेरूप की शीतल छाँव किएकहाँ चली ओ मृगनयनीतन पर सोलहसिंगार किए।

मं शर्मा (रज़ा)

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