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अभिमंत्र


मुठ्ठी भर के यंत्र कीकैद में समस्त तंत्र हैंथमे हुए जीवन कीरफ्तार भी अभिमंत्र है

अभावों के प्रभाव सेजीवन कई त्रस्त हैंगैरजरूरी जरूरतों कोपाने में सभी व्यस्त हैं।

मं शर्मा (रज़ा)

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