मैं नादान उद्दंड अभिमानीतेरी महिमा मैंनें न जानीमैं याचक कर जोड़े खड़ा हूँतुम सा कहाँ दूजा कोई दानीतेरी क्षमा का प्रार्थी हूँ मैंबना दे तू मेरी जिंदगानीतेरी दया के गुण गाएं सबसुन कर तेरी मेरी कहानी ।मं शर्मा (रज़ा)
मैं नादान उद्दंड अभिमानीतेरी महिमा मैंनें न जानीमैं याचक कर जोड़े खड़ा हूँतुम सा कहाँ दूजा कोई दानी
तेरी क्षमा का प्रार्थी हूँ मैंबना दे तू मेरी जिंदगानीतेरी दया के गुण गाएं सबसुन कर तेरी मेरी कहानी ।
मं शर्मा (रज़ा)