सुन जरा क्या ये मुझे बादल घनेरा बोलता है

कैद मुट्ठी में किया इसने सवेरा बोलता है

एक कतरा भी नहीं इन तेज लहरों का अभी ये

नासमझ पर देख खुद को एक दरिया बोलता है

एक जर्रे का सहारा ही बहुत है डूबते को

तुंद भंवर हारता जब एक तिनका बोलता है

कौन इसको ये बताए के यहाँ तुम रब नहीं हो

लड़खड़ा ये नींव जाती जब फकीरा बोलता है

काट पहाड़ कोहकन हर रास्ता है खोल देता

ढह चट्टान एक जाती जब हथौड़ा बोलता है

इन फिजाओं में जहर मत इस कदर तू अब मिला के

सांप छुपते हैं बिलों में जब सपेरा बोलता है

हैं पिघलते सख्त पत्थर देख भोली सूरतों को

ये खुदा भी टूटता जब एक बच्चा बोलता है

छोड़ गुरूर प्यार करले के जरा तू जिंदगी जी

इल्म सारा इश्क ही है ये कबीरा बोलता है

तू पिला दे यूँ मुझे के होश साकी ना रहे अब

नाचने दे मय मुझे तू आज प्याला बोलता है

पी रखी गर मय किसी ने है वही के होश में अब

वो नहीं फिर और कुछ सच के अलावा बोलता है