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क्रान्ति


कुछ दूर तक तो वो साथ चले थे...अब सुना है,वो घर को लौट गए।क्रांति संघर्ष में....अक्सर थकन से, लोग टूट जाते हैंघर को लौट जाते हैं।चुपचाप।

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