पहाड़ की औरतें हिमालय सी ही होती है
पहाड़ी औरतें अद्भुत विस्तार लिए
दिल में उद्गार लिए
कहीं भी कम नहीं पड़ती पहाड़ी औरतें
जहाँ भी हो ज़रूरत पहुँच हीं जाती हैं पहाड़ी औरतें
जैसे सुगंध देवदार का
या फूल लाल बुरांस का
घर, आँगन, गोरु, जंगलात
सब को साधती है पहाड़ी औरतें
दिन को एक ठौर से दूसरे ठौर तक पहुँचाती
रात को सँवारती,
संभालती पहाड़ी औरतें
पहाड़ के जंगल,
जंगल में आग
आग से जले, झुलसे,
मर रहे जंगलात को
अपना क्षीर पीला जिन्दा करती
पालती, पोस्ती, पहाड़ी औरतें
पहाड़ को थुमी सी थामे रहती हैं पहाड़ी औरतें
### मनीष कुमार


