बाप होना ब्रह्माण्ड होना है
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बाप होना ब्रह्माण्ड होना है
उस से भी पहले कोई वृषभ बैल होना है
गर्दन गोते, कंधा उचकाए
मन दो मन भार माथे टिकाए
पीठ गहिर और कमर अकड़ाए
सब बोझ - भार कंधे उठाए रखना है
बाप होना ब्रह्माण्ड होना है
उस से भी पहले कुशल कोई किसान होना है
धुप दुपहरी हो या ठिठुरन भरी रात्रि हो
नित्य निरंतर कार्यरत प्रहरी है
भुजबल, आत्मबल ठोके ठहरे हैं
बंजर हो धरती या मरुभूमि ठोस हो
नेह, रक्त, स्वेद से सींचते जमीं को
धन, धान से जागृत करते भाग्य को
बाप होना ब्रह्माण्ड होना है
वक़्त, बेवक्त कठोर कोई चट्टान होना है
कितना भी हो घात - प्रतिघात
कदम गड़ाए और सीना टिकाए रखना है
कुटुंब पर जो आए आँच
तो सर्वस्व न्योछावर करना है
बाप होना ब्रह्माण्ड होना है
मन, ह्रदय का असीमित विस्तार होना है
यथा स्थान सब को निखरने, निखारना
सब को समेटे, सब में खुद को समेटे
फिर भी सबसे अलहदा, ओझल, निरंकार होना है
बाप होना ब्रह्माण्ड होना है।
### मनीष कुमार


