एक मुस्कुराहट के लिए तुम्हारी में दुनिया भूल जाती हूँ
जब तुम्हारे करीब आती हूँ
लगा के सीने से तेरी बातों को जब मैं खूब हंसती हूँ
जब बातों को तुम्हारी में याद करती हूं तो सवार जाती हूँ
जब तुम्हारे करीब आती हूँ
वो कहती है तुम पगली हो ,हा हुं मैं पागल भी तुम्हारे प्यार में इसलिए अक्सर बातों से पट जाती हूँ
जब तुम्हारे करीब आती हूंँ
मुस्कुराती हूं खुश रहती हूं इतराती हूँ
और फूलों की तरह खिल उठती हूं चहक उठती हूंँ
जब वो आते हैं बेसबरी में अनकहे गीत गाती हूंँ
जब तुम्हारे करीब आती हूंँ
समंदर जैसा प्यार है तुम्हारा,
और में उसके बहाव में बह जाती हूंँ
सज के संवर के तुम्हारा मन मोह लेती हूंँ
जब तुम्हारे करीब आती हूं।