चमकती हुई रोशनी से नहाया हुआ ये शहर
नहीं तो होती हमेशा सुनी सड़क सुनी डगर
कहीं खुशियों की किलकारी तो कहीं पठाको का शोर
इसमे छुप जाता शहर का हर शोर
धुआ भी है आग भी है
रोशनी के पीछे राख भी है
दिवाली एक रात नहीं उम्मीदों की बात भी है

चमकती हुई रोशनी से नहाया हुआ ये शहर
नहीं तो होती हमेशा सुनी सड़क सुनी डगर
कहीं खुशियों की किलकारी तो कहीं पठाको का शोर
इसमे छुप जाता शहर का हर शोर
धुआ भी है आग भी है
रोशनी के पीछे राख भी है
दिवाली एक रात नहीं उम्मीदों की बात भी है