नाम है मेरा भास्कर तो तुम ये मत समझो मैं चांद को नहीं जानता मैं उगता हूं सुबह तो तुम समझो दिन हुआ मैं ढलता नहीं सिर्फ  u tern लेता हूं तो तुम ये मत समझो दिन भी अस्त हुआ अस्त व्यस्त सी जिंदगी में में भी बड़ा ही व्यस्त हूं कितने काम होते हैं चांद को चमकाना उसकी परछाई बन कर जलता भी हूं तो रोशनी के लिए ।