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बदला रूप


एक बदली सी ख़ामोशी एक बदला सा आसमा हर वक़्त बदलते रूप तेरे कोई समझ ही नहीं पाता ये चल क्या रहा है जो भी यहीं अंत है न की अनंत है

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