
चाँद क्या कभी मिला तुम्हें तनहा
तारे सब साथ मगर वो खड़ा रहा तनहा
बुझ गयी हर तरफ़ की आग
उड़ता रहता है पर वो धुआँ तनहा
ना जाने कितने चेहरों से घिरा रहता है
दिल मिला मगर हर जगह तनह
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चाँद क्या कभी मिला तुम्हें तनहा
तारे सब साथ मगर वो खड़ा रहा तनहा
बुझ गयी हर तरफ़ की आग
उड़ता रहता है पर वो धुआँ तनहा
ना जाने कितने चेहरों से घिरा रहता है
दिल मिला मगर हर जगह तनह