काश के तुम कोई देवता होती,
मैं भक्त तुम्हारा बन जाता ।
काश के तुम कोई गुरु होती,
मैं शिष्य तुम्हारा बन जाता ,
काश के तुम होती अदालत ,
मैं मुंजरिम बन कर आ जाता ,
काश के तुम होती कोई वेद,
मैं सार तुम्हारा बन जाता ,
काश के तुम गंगा होती ,
मैं जटा संकर की बन जाता ,
काश के तुम सरकार होती ,
मैं संसद सा बन जाता ,
तुम बताओ तुम कैसी हो ,
मैं वैसा सा कुछ बन जाऊं,
मैं भी तुमको राश आऊँ ,
मैं भी तुमको भा जाऊँ,
चलो तुम कोई लेखक बन जाओ ,
मैं शब्द तुम्हारे बन जाऊँ ।
