Dear crush ,

मैं सोचता हूँ की तुमसे बात करू,फिर सोचता है लेकिन क्यों ,

फिर सोचता हूं क्योंकि शायद हम दोस्त हो चुके है

फिर सोचता हूं ये कब हुआ ,फिर सोचता हूं चलो एक text कर ही देता हूँ ,फिर सोचता हूं उससे क्या होगा एक से 2 ,2 से 4 और 100 करने का मन होगा ,फिर सोचता हूं शायद कर देना चहिये ,और सच कहूँ तो मुझे 2 से 100 तक पहुँचाने का हुनर मैंने सिखा ही नही ।

पर ये भी सोचता हूं क्या मुझसे पहले लोगो ने तुम्हे लोगो ने approach नही किया होगा ,कही उनकी approch की तरह मेरा भी अर्जी ठंडे बस्ते में ना चली जाये और वक़्त इतना कम है हमारे पास की सच कहू तो कभी कभी ये सोच के भी नही करता ,पर जब मैं तुम्से दूर रहने या हो जाने की सोच रहा होता हू तब भी यकीन मानो मैं तुम्हारे बारे में ही सोच रहा होता हूं ,मुझे लगता है सारी सोचो को परे रख के मुझे तुमसे बात कर लेनी चाहिए की क्या बस एक शाम के लिए तुम कॉफ़पे चलोगी मेरे साथ ,जहाँ मैं तुम्हारी ढेर सारी बातें सुन सकु अपना कुछ बता सकूँ ,सच कहूं तो मुझे कॉफी का शौक नही है पर तुम्हारे साथ शायद वो भी चाय जैसी ही लगे ,फ़िर सोचता हूं कि शायद तुमसे मैं कभी पूछ ही ना पाउ ,मुझे लगता है मैं बहुत सोचता हूं ,तुम क्या कहती हो?ी