नाकामयाब नही नायब हूं

ढलती शाम की तरह ओझल होते हौसलों पर ,

उम्मीदों का चमकता चांद हूं

नाकामयाब नही नायब हूं ।।

टूटते सपनो के बीच एक बार फिर से

कुछ करने के आस लिए बैठा मैं

नाकाम होता हर रोज

एक -रोज सफलता की आस में