
तमाम उम्र हमने शरारत की बहुत
अम्मी अब्बू ने फिर हिफाज़त की बहुत।।
अपने अपने हुनर में दोनों माहिर थे
उसने दगा की मैंने मोहब्बत की बहुत।।
कहते हैं शराबियों का साथ अच्छा नहीं
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तमाम उम्र हमने शरारत की बहुत
अम्मी अब्बू ने फिर हिफाज़त की बहुत।।
अपने अपने हुनर में दोनों माहिर थे
उसने दगा की मैंने मोहब्बत की बहुत।।
कहते हैं शराबियों का साथ अच्छा नहीं